इलाहाबाद विश्वविद्यालय के छात्रसंघ चुनाव में इस बार युवाओं का जोश देखते ही बना। सुबह आठ बजे से ही मतदान केंद्रों पर लंबी कतार देखने को मिली। सुबह से शुरू हुई वोटों की वर्षा अनवरत दो बजे तक जारी रही। युवा जोश में आपातकाल के बाद इस बार सर्वाधिक 48.5 फीसद मतदान हुआ। इससे पहले सन 73-74 के छात्रसंघ चुनाव में 70 फीसद मतदान हुआ था। इलाहाबाद विश्वविद्यालय में इस बार कुल 19031 मतदाता थे। इनमें छात्रों की संख्या 13454 व छात्राओं की संख्या 5577 थी। विश्वविद्यालय में कुल 9231 मत पड़े। छात्रों के 7438, जबकि छात्राओं के 1793 मत पड़े। इसे प्रतिशत में देखेंगे तो कुल मतदान 48.5 फीसद पड़ा जोकि पिछले साल पड़े वोटों 45.5 फीसद से तीन फीसद ज्यादा है। छात्रों का मत प्रतिशत 55.28 फीसद जबकि छात्राओं का 32.10 रहा। आपातकाल से पूर्व जगदीश चंद्र बने थे अध्यक्ष :

70 के दशक में इलाहाबाद विश्वविद्यालय छात्रसंघ के अध्यक्ष रहे विनोद चंद्र दुबे बताते हैं कि आपातकाल से पूर्व 1973-1974 में जगदीश चंद्र दीक्षित छात्रसंघ अध्यक्ष बने थे। उस वर्ष 70 फीसद मतदान हुआ था। इसके बाद आपातकाल दशक में 1967-1968 में मतदान का प्रतिशत 81 फीसद तक गया था। उस समय छात्रावासों में ही छात्रों के मतदान की व्यवस्था हुआ करती थी। डेलीगेसियों में रहने वाले छात्र-छात्राओं को मतदान की व्यवस्था छात्रावासों में ही दी जाती थी। न कोई पुलिस और न ही कोई बैरिकेडिंग। राजनीति का क्रेज भी था अलग :

उस समय छात्र राजनीति का क्रेज भी अलग था। कोई डर और भय नहीं था। मुद्दों और नीतियों की राजनीति होती थी। चुनाव अधिकारी प्रो. आरके उपाध्याय ने कहा कि मत प्रतिशत के बढ़ने के पीछे कारण कैंपस व शहर में अराजकता पर काफी हद तक अंकुश रहा। इस बार डेलीगेसियों से निकले छात्र-छात्राएं :

इलाहाबाद विश्वविद्यालय का हर बार ट्रेंड रहा है कि छात्रावासों में रहने वाले छात्र ही छात्रसंघ में सक्रिय भागीदारी निभाते थे। डेलीगेसियों से चुनाव में छात्र-छात्राओं की सक्रियता कम रहती थी। इस बार देखा गया कि डेलीगेसियों से छात्र-छात्राओं ने आकर मतदान किया।

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